पिछले महीने से महंगे वरिष्ठ पिछले महीने मार्च मेंह में वरिष्ठ सदस्य श्री महिपाल जैन (रिटायर्ड वरिष्ठ बैंक अधिकारी) ने शिखरजी की यात्रा की थी। उन्होंने अनुभव साझा किये हैं. जोकि सबके विचारार्थ प्रस्तत हैं_

1. डोली वालों ने रेट बहुत बड़ा दिए हैं, जो एक साधारण आय वेले परिवार को वहन करना मुश्किल है। इसके अलावा 600 रुपये सभी से डोली के अतिरिक्त लिए जा रहे हैं, जबकि डोली का और पैदल वालों का मार्ग एक ही है। डोली यनियन औरतीर्थ क्षेत्र कमेटियों में कोई तालमेल नजर नहीं आयाकमेटी इस पर मौन रहती हैचूँकि डोली वालों को यनियन है और वे जानते हैं कि याची नो पर्वत पर जायेगा ही सो उनकी मनमानी चलती है।


2. ज्यादातर लोग पिकनिक के हिसाब से वहाँगये हैं/जाते हैं ऐसा अनुभव हआक्योंकि बच्चों को कोकों पर कोई आकर्षण लगता नहीं, उनकी यात्रा सिर्फ खाने-पीने तक सीमित रहती है, इस तरह का लगा। महिलाएँ खरीददारी में ऐसे जुट जाती हैं, जैसे कि उनके शहर में कुछ मिलता ही न हो।


3. देखा कि डोली में यात्रा करने वाले धन्ना सेठ भी डोली में बैठे-बैठे बहुत जल्दी थक जाते हैं सो रहें हरपटावर हा टोंक के बाद कछ-न-कछ खाने को चाहिए। इसे देखकर बच्चों पर भी बुरा असर पड़ रहा है।


4. समूचे पहाड़ पर लाइट फिटिंग का कार्य हो रहा है। पता नहीं इसके दूरगामी परिणाम क्यो हो सकते हैं? लग रहा है कि सरकार की योजना इसे पर्यटन स्थल बना कर ही रहेगी।


5. भुक्कड़ों की वजह से पर्वत की पवित्रता तार-तार हो रही है। पर्वत के रास्ते पर और ऊपर जगह-जगह दुकानें होने से गंदगी, सड़ती जूठन एवं प्लास्टिक का कचरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पता नहीं कि यात्रियों को दिखता नहीं या ज्ञान नहीं है जोकि वे पर्वत की पवित्रका को नष्ट करने में पूरा योगदान दे रहे हैं। पर्वत का कण-कण पवित्र है, कोई इसे व्यवहार में मान में रहा हो, ऐसा लगता नहा है


6. आराद तलब व्यक्तियों को तो नीचे से ही पर्वतराज को नमस्कार कर लेना चाहिए। क्योंकि ये लोग तीर्थ की लेना चाहिएक्य पवित्रता तथा धर्म के साथ-साथ, जैनों की छवि भी सार्वजनिक तौर पर बदनाम कर रहे हैं।


7. अच्छा हो, पर्वत पर जाने से पूर्व सभी यात्रियों को निर्देश दिए जाएँ कि पर्वत पर कोई सामान न खरीदें। पानी आदि डोली में नीचे से लेकर जाएँ। उन्हें ग्रुप में भेजा जाए।


8, पर्वत के रास्ते पर और ऊपर जगह-जगह जो दुकानें लगाकर गंदगी, जूठन एवं प्लास्टिक का कचरा लगातार बढ़ाने में लगे हैं, उन्हीं के घरवाले कटोरा लेकर भीख का बिजनेस करने में लगे हैं। पता नहीं कि यात्रियों को क्यों नहीं सबदिखता है और क्यों नहीं भीख न देने का प्रण कर पाते हैं?


आँखों देखी शिखरजी यात्रा


 


9. अब डाक बंगले के पास मोटर साइकिल वाले खडे रहते हैं और लोग जल्दीभागने के चक्कर में मोटरसाइकिल से भागते हैं। उनकी भी एक मजबूत यूनियन बन गयी है, जो यात्रियों से दुर्व्यवहार करने को तैयार बने रहते हैं। उन्हें पता है। अतः लौटते समय मोटरसाइकिल से न लौटेंपैदल या डोली से ही लौटें। मोटरसाइकिल पर सवार होकर लौटने वाली बच्चियों से छेड़छाड़ की घटनाओं से बचा नहीं जा सकता। आँखों देखी मक्खी निगली जा रही है


10. मेरे विचार से सभी पंथियों की कमेटियों को 3-4 महीने में बैठक कर विचार करना चाहिए। एक आचार संहिता लागू करने की आवश्यकता है अन्यथा बहुत देर हो जायेगी। शिखरजी की यात्रा पर जाने वाले और उन्हें ले जाने वाले विचार करें कि पर्वतराज शिखरजी के लिए गिरनारजी या पालीताना बनने से रोकने के लिए उनकी कुछ जिम्मेदारी है भी या नहीं है?